[A] विजय सिंह पथिक – टॉडगढ़ जेल
[B] अर्जुन लाल सेठी – बेलूर जेल
[C] जोरावर सिंह – बरेली जेल
[D] केसरी सिंह बारहठ – हजारीबाग जेल
Answer: [C]
व्याख्या: 1912 ई. में दिल्ली कांड लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंके जाने के समय कुंवर प्रतापसिंह बारहठ अपने चाचा जोरावर सिंह बारहठ के साथ मौजूद थे। इस घटना के बाद जोरावर सिंह राजस्थान और मालवा के वनाच्छादित पर्वतीय प्रदेशों में अमरदास वैरागी के नाम से फरार अवस्था में 27 वर्षों तक भटकते रहे।
1939 को एकलगढ़ (मंदसौर) में नारू रोग से जूझते हुए फरारी अवस्था में जोरावर सिंह की मृत्यु हो गई। प्रतापसिंह को बनारस काण्ड के संदर्भ में गिरफ्तार कर बरेली जेल में रखा गया जहाँ अमानुषिक यातनाओं के कारण 24 मई 1918 को प्रतापसिंह शहीद हो गए।