दूधवा खारा किसान आन्दोलन: नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट में आप राजस्थान में किसान आन्दोलन से संबंधित दूधवा खारा किसान आन्दोलन के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे।
दूधवा खारा किसान आन्दोलन
- 1922 ई. में बीकानेर रियासत के दुधवा खारा नामक स्थान पर यह आंदोलन चलाया गया। दूधवा खारा वर्तमान में चूरू में है।
- दूधवा खारा आंदोलन का नेतृत्व मद्याराम वैद्य, रघुवर दयाल तथा हनुमानसिंह आर्य ने किया।
- खेतू बाई ने दूधवाखारा किसान आंदोलन में महिलाओं का नेतृत्व किया।
- हनुमान सिंह को रतनगढ़ में गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध राजद्रोह का मुकद्दमा चलाया गया। 4 जनवरी 1948 ई. को उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।
- बीकानेर के किसान आंदोलन के इतिहास में दूधवा खारा किसान आंदोलन सबसे अधिक महत्वपूर्ण रहा।
- वर्ष 1944 ई. में दूधवाखारा के जांगीरदार ठाकुर सूरजमल सिंह ने किसानों को उनकी जोत से बेदखल कर दिया।
- चौधरी हनुमान सिंह के नेतृत्व में किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल 2 जून 1945 ई. को माउंट आबू में महाराजा सार्दूल सिंह से मिला।
- दूधवा खारा आन्दोलन के हनुमानसिंह बुडानिया बीकानेर रियासत की पुलिस सेवा में भर्ती थे।
बीकानेर किसान आंदोलन को दो भागों में विभक्त कर सकते है-
1. प्रथम भाग – गंगनहर से जुड़ा हुआ था।
2. दूसरा भाग – जागीरी गाँव से जुड़ा हुआ था।
1937 में लाग-बाग के संबंध में बीकानेर में प्रथम किसान आंदोलन जगजीवन चौधरी के नेतृत्व में उदासर (बीकानेर) में शुरू हुआ।
NOTE: दुधवा खारा किसान आंदोलन और कांगड़ कांड का सम्बन्ध बीकानेर किसान आंदोलन से था। रावला घड़साना किसान आंदोलन की घटना 2004 मैं हुईं थी।
रायसिंहनगर की घटना
- बीकानेर प्रजा परिषद् के नेतृत्व में दूसरा किसान आंदोलन रायसिंह नगर की घटना को लेकर हुआ।
- प्रजा परिषद ने 17 जुलाई 1946 ई. को संपूर्ण बीकानेर राज्य में किसान दिवस मनाया गया।
- यह किसान आंदोलन चौधरी कुम्भाराम आर्य के नेतृत्व में 1946 ई. में हुआ।
कांगड़ काण्ड
- किसान आंदोलन के इतिहास की अंतिम महत्वपूर्ण घटना 1946 ई. का कांगड़ काण्ड थी।
- बीकानेर की रतनगढ़ तहसील के कांगड़ा गाँव के जागीरदार ने 1946 ई. में अकाल के बावजूद किसानों से कर वसूली का प्रयास किया, जिसके विरुद्ध किसानों ने सफल आंदोलन किया।
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