तिमनगढ़ किला (करौली) रहस्यों और वैभव से जुड़ी धरोहर
राजस्थान का करौली जिला अपनी प्राचीन धरोहरों और स्थापत्य कला के लिए विख्यात है। इन्हीं में शामिल है तिमनगढ़ किला, जिसे तवनगढ़ भी कहा जाता है। इतिहासकारों के अनुसार इसका निर्माण लगभग 1100 ईस्वी में हुआ, किंतु शत्रु आक्रमण में यह शीघ्र नष्ट हो गया।
बाद में यदुवंशी शासक राजा तिमनपाल ने इसका पुनर्निर्माण कराया और तभी से इसे तिमनगढ़ नाम मिला।
यह दुर्ग अपनी नक्काशीदार मूर्तियों और मंदिरों के कारण विशिष्ट महत्व रखता है। यहां की शिल्पकला 11वीं-12वीं शताब्दी की कलात्मक परंपरा का अनूठा प्रमाण है। माना जाता है कि किले के मंदिरों के नीचे अनेक दुर्लभ प्रतिमाएं और खजाना छिपाया गया था, जिससे यह रहस्यमयी किंवदंतियों का केंद्र बन गया।
आज भी यहां के मंदिरों की छतों और स्तंभों पर बने ज्यामितीय और पुष्प अलंकरण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पास स्थित सागर झील में एक पारस पत्थर है, जिसके स्पर्श से धातु सोने में बदल सकती है।
तिमनगढ़ किला केवल इतिहास का प्रतीक नहीं, बल्कि उन रहस्यों का संरक्षक भी है, जो राजस्थान की सांस्कृतिक और पौराणिक परंपराओं को जीवंत रखते हैं।
