(A) सिलिका सैण्ड
(B) फायर क्ले
(C) चाइना क्ले
(D) डोलोमाइट
Answer: C
चाइना क्ले यह ‘केओलिन’ के नाम से जानी जाती है और तापरोधी क्षमता एवं लचीलेपन के कारण उपयोगी है। राजस्थान के अलवर, बाड़मेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, जयपुर, नागौर, जैसलमेर और उदयपुर जिलों में पाई जाती है। देश के कुल उत्पादन का 45 प्रतिशत चाइना क्ले का उत्पादन राजस्थान में ही होता है।