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भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत संघ में अवशिष्ट शक्तियाँ दी गई थीं

[A] संघीय विधायिका

[B] गवर्नर जनरल

[C] प्रांतीय गवर्नर

[D] प्रांतीय विधानमंडल

Answer: B

भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत संघ में अवशिष्ट शक्तियाँ गवर्नर-जनरल (वायसराय) को दी गई थीं।

भारत शासन अधिनियम 1935 की मुख्य विशेषताएं

  • भारत के वर्तमान संविधान का प्रमुख स्रोत 1935 का अधिनियम है।
  • भारत में सर्वप्रथम संघीय शासन प्रणाली की नींव रखी गई। संघ की दो इकाइयाँ थीं- ब्रिटिश भारतीय प्रांत तथा देशी रियासतें।
  • संघीय व्यवस्था कभी अस्तित्व में नहीं आई क्योंकि देसी रियासतों ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया।
  • अवशिष्ट शक्तियाँ गवर्नर-जनरल (वायसराय) को दे दी गई।
  • इस अधिनियम के तहत केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का बँटवारा किया गया तथा राज्य में द्वैध शासन समाप्त कर केंद्र में द्वैध शासन लागू किया गया।
  • इस अधिनियम ने केंद्र और इकाइयों के बीच तीन सूचियों– संघीय सूची (59), राज्य सूची (54) और समवर्ती सूची (36) के आधार पर शक्तियों का बँटवारा कर दिया।
  • दलित जातियों, महिलाओं और मजदूर वर्ग के लिये अलग से निर्वाचन की व्यवस्था ।
  • इसने भारत शासन अधिनियम 1858 द्वारा स्थापित भारत सचिव की परिषद को समाप्त कर दिया।
  • मताधिकार का विस्तार हुआ (लगभग 10 प्रतिशत जनसंख्या)।
  • देश की मुद्रा और साख पर नियंत्रण के लिये भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना की गई।
  • भारत शासन अधिनियम 1935 के प्रावधानों के अनुरूप 1937 में वर्मा को भारत से अलग कर दिया गया।
  • संघ लोक सेवा आयोग, प्रांतीय सेवा आयोग तथा दो या अधिक राज्यों के लिये संयुक्त सेवा आयोग की स्थापना हुई।
  • इसके तहत 1937 में संघीय न्यायालय की स्थापना हुई।

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